इश्क़ करने का अक्सर यही अंजाम होता है
के कुछ वक़्त बाद, साथी सिर्फ ज़ाम होता है
केवल मुजरिम ही नहीं बुरे दुनिया की नज़र में
हम आशिक़ो का भी नाम बहुत बदनाम होता है
तुम कहते हो की ज़िन्दगी में कुछ करो, आगे बढ़ो
बताओ, हम जैसों को मोहब्बत के सिवा और क्या काम होता है
कामयाब और मशहूर होने से यार मिल जाएगा
ऐ दुनिया तेरे यह तो इश्क़ का भी दाम होता है
हिदायत मिलती है कि ये सब छुप छुप के करो
अरे तेरे शहर में तो क़त्ल भी सरेआम होता है
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मज़ार-ए-इश्क़
मज़ार-ए-इश्क़ में शरीक होना जरूरी है क्या?
कीमत-ए-जायदाद के लिए उसे खोना जरूरी है क्या?
जिसने तुम्हे हर पल बस हंसना सिखाया
ऐसे शख्स की मईयत्त पर रोना जरूरी है क्या?
तुम्हारी नाकामयाब रंजिशें
रंजिशे तो बहुत करते हो तुम
मुझे सलीखे सीखाने की
जाओ पहले तालीम तो लेकर आओ
मुझसे दुश्मनी निभाने की