मज़ार-ए-इश्क़ में शरीक होना जरूरी है क्या?
कीमत-ए-जायदाद के लिए उसे खोना जरूरी है क्या?
जिसने तुम्हे हर पल बस हंसना सिखाया
ऐसे शख्स की मईयत्त पर रोना जरूरी है क्या?
Tag: shayari
Friend-Zone
I am caught in between
the shenanigans of love
and
the innocence of friendship
floating in her eyes.
Save Paper

Every night
अब तो हर रात की यही कहानी होती जा रही है
थोड़े आंसू निकलते हैं पर किताब पूरी होती जा रही है