तू है

है तू दरिया , तू है महताब
तू साया , तू ही आफताब
चल राख उठा
और रगड़ माथे पर
धरती को अभी
कंपकपाना है
पसीने से बनाते
है नाम यहाँ लोग
तुझे तो आखिर
लहू बहाना है