सफर में नहीं मिलता, घर में नहीं मिलता
क्या खो गया है तुषार, तुम्हे चैन क्यों नहीं मिलता

Every night

अब तो हर रात की यही कहानी होती जा रही है
थोड़े आंसू निकलते हैं पर किताब पूरी होती जा रही है

तू है

है तू दरिया , तू है महताब
तू साया , तू ही आफताब
चल राख उठा
और रगड़ माथे पर
धरती को अभी
कंपकपाना है
पसीने से बनाते
है नाम यहाँ लोग
तुझे तो आखिर
लहू बहाना है