मज़ार-ए-इश्क़ में शरीक होना जरूरी है क्या?
कीमत-ए-जायदाद के लिए उसे खोना जरूरी है क्या?
जिसने तुम्हे हर पल बस हंसना सिखाया
ऐसे शख्स की मईयत्त पर रोना जरूरी है क्या?
मज़ार-ए-इश्क़ में शरीक होना जरूरी है क्या?
कीमत-ए-जायदाद के लिए उसे खोना जरूरी है क्या?
जिसने तुम्हे हर पल बस हंसना सिखाया
ऐसे शख्स की मईयत्त पर रोना जरूरी है क्या?